Saturday, November 13, 2010

सर्पदंश के मरीजों को मिलता नवजीवन !



यह अंधविश्वास है या आस्था अथवा वास्तव में है कुछ सत्य कि देखते ही देखते बांसडीहरोड रेलवे स्टेशन के पास बन गया एक ऐसा धार्मिक स्थल जहां जाने के बाद सर्पदंश का शिकार कोई मरीज शायद ही मरा हो। पहले लोग गाजीपुर में अमवा की सती माई स्थान जिसे वास्तव में पूर्वाचल के लोग जागृत स्थल मानते है, पर जाते थे लेकिन अब सर्प दंश से पीड़ित को लेकर सीधे यहीं पहुंच रहे है। करीब दो माह पूर्व अस्तित्व में आये इस स्थल के सूरत-ए-हाल अब बिलकुल ही बदल गये है। जिला मुख्यालय से करीब दस किमी दूर कभी वीरान रहने वाले इस स्थान पर अब हर दिन मेला सा लगा रहता है। सोमवार व शुक्रवार को तो भीड़ का आलम पूछिये मत। अब यहां मंदिर निर्माण की कवायद प्रारम्भ हो गयी है।

सिलसिला दरअसल दस सितम्बर को अनोखे अंदाज में प्रारम्भ हुआ था। बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के मनियारी जसांव गांव में मानती देवी नामक एक महिला पर सती माई के सवार होने की खबर पूरे क्षेत्र में जंगल में लगी आग की तरह फैल गयी। उसे देखने के लिए क्षेत्र के लोग हजारों की संख्या में मौके पर पहुंच गये। इस महिला की मांग पर सती मइया के लिए बांसडीहरोड रेलवे क्रासिंग के पास स्थित बागीचे में स्थान दिया गया। जानकारी होने पर कुछ ही देर बाद सर्प दंश से मृत एक महिला को उसके पास लाया गया लेकिन चिकित्सकीय इलाज होने के कारण उसने उसके शव को वापस लौटा दिया।
मानती के पति विनोद बिंद बताते है कि उसकी पत्‍‌नी को तीन बार सांप ने डंसा था। अमवा के सती माई स्थान पर ले जाने के कारण वह हर बार बच गयी। एक दिन अचानक उसके पैर के बीच से सांप गुजरा और वह बेहोश हो गयी। उसे तत्काल अमवा के सती माई स्थान पर ले जाया गया। कुछ देर बाद वह ठीक हो गयी। इसके बाद वहीं वह चिल्ला-चिल्ला कर अपने ऊपर सती माता के सवार होने की बात कह कर बैठ गयी। इस दौरान वहां पहुंचे सर्प दंश के तीन-चार मरीजों को झाड़ फूंक कर उसने ठीक भी कर दिया। इसके बाद कहा कि गाजीपुर से आने वाले रास्ते में एक प्रेत हमारे प्रभाव को कम कर दे रहा है इसलिए मेरा अब इस स्थान पर रहना उचित नहीं है। इसके बाद मानती यहां अपने घर चली आयी। अगले दिन शाम को वह बताने लगी कि वह सती माई है और ऐसा कह कर वह अपने लिए स्थान मांगने लगी। इस पर परिजनों ने तीन स्थानों का प्रस्ताव उसके समक्ष रखा। इस पर वह घर से तेजी से निकल पड़ी और बांसडीहरोड रेलवे क्रासिंग के पास बागीचे के एक स्थान पर खड़ी होकर आम की डाल वहां गाड़ दी। इसके बाद बैठ कर पूजा पाठ करने लगी। इसकी खबर लगते ही खेड़सर में सर्प दंश से मृत लीलावती पत्‍‌नी स्वामी नाथ के शव को वहां लाया गया। उसके ऊपर मिट्टी का लेप लगाने के बाद इलाज होने के कारण उसे भी छोड़ दिया। उस स्थान पर महिलाओं ने पूजा पाठ शुरू कर दिया। मानती देवी ने जिस स्थान पर आम की डाल गाड़ी थी वह जमीन मौजूदा ग्राम प्रधान पूजा देवी पत्‍‌नी टुनटुन यादव की है। शेष जमीन जहां दुकानें लग रही है वे शिवदत्त मिश्र व उनके पट्टीदारों की है। दुकानदारों से ये लोग रोजमर्रा के हिसाब से पांच-दस रुपये वसूल करते है। दुकानदारों के अनुसार सोमवार व शुक्रवार को उन्हे हार-दो हजार की आय हो जाती है। इस धार्मिक स्थल पर पूजा-पाठ मानती की पति विनोद द्वारा ही किया जाता है।

सिर पर हाथ फेरा जिन्दा हो गया बालक

बात उन्हीं दिनों की है। सर्पदंश से पीड़ित तीन वर्षीय अचेत बालक के सिर पर हाथ फेर मानती देवी ने थोड़ी सी मिट्टी क्या छिड़का, शिशु की आंखें खुलने लगीं और वह उठ कर खेलने लगा। फिर क्या था तमाशबीन के रूप में खड़े सैकड़ों लोगों ने सती माई के जयकारे लगाने शुरू कर दिये। उस दौरान बाजे-गाजे के साथ उस बच्चे को पूरे क्षेत्र में घुमाया गया था। बड़की शेरिया निवासी वीरेन्द्र पासवान के तीन वर्षीय पुत्र रोहित को सर्प ने डंस लिया था। परिजन अमवा की सती माई के नाम पर पैसा रख उसे सीधे बांसडीह रोड रेलवे क्रासिंग स्थित उस स्थान पर लाया गया। बुलाने पर थोड़ी देर बाद वहां मानती देवी पहुंची। कुछ देर पूजा करने के बाद उन्होंने अचेत रोहित के सिर पर हाथ फेरा और थोड़ी सी मिट्टी उसके शरीर पर डाल दिया। देखते ही देखते रोहित ने अपनी आंखें खोल दी। थोड़ी ही देर बाद रोहित पूर्णरूप से स्वस्थ बालक की भांति खेलने लगा। इस तरह के करीब पांच दर्जन से अधिक मामले प्रकाश में आ चुके है।

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