Thursday, April 30, 2009

बलिया जिला जेल में फांसी लगा कैदी ने की खुदकुशी

बलिया। जिला कारागार में हत्या के प्रयास में बंद एक कैदी ने बुधवार की देर रात को बैरक के जंगले से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस सनसनीखेज घटना के बाद जेल में हड़कम्प मच गया। जिले के आला अधिकारी पहुंचकर मौका मुआयना किए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिवार वालों ने जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाया है।

बताते है कि नरहीं थाना क्षेत्र के पिपराकलां निवासी रामजी सिंह पुत्र सुदर्शन सिंह हत्या के प्रयास व आ‌र्म्स एक्ट में जिला कारागार की बैरक नम्बर 3डी में बंद था। इस बैरक में 50 कैदी उसके साथ थे। रात को लगभग साढ़े ग्यारह बजे एकाएक कैदियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर बंदी रक्षक तत्काल मौके पर पहुंच गये। अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गये। इसकी सूचना तत्काल जिले के आला अधिकारियों को दी गयी। सूचना पर पहुंचे अधिकारी तत्काल जिला जेल पहुंचे और शव को नीचे उतरवाया। यह कैदी गमछे के सहारे जंगले से लटका हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिला जेल का वह जंगला जिसके सहारे कैदी ने फांसी लगायी उसकी लम्बाई कम थी। परिवार वालों ने जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाया है। इधर घटना की सूचना के बाद पहुंचे बसपा जिलाध्यक्ष इंदल राम, राम प्रवेश व शम्भूनाथ ने बैरक का निरीक्षण किया। साथ ही जेलर से घटना की जानकारी ली।

1 comment:

  1. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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