बलिया। चन्द्रशेखर ट्राफी के लिए खेली जा रही 43 वीं सीनियर नेशनल खो-खो चैम्पियनशिप में पुरुष व महिला वर्ग के खिताबी मुकाबले पांच सितम्बर को यहां वीर लोरिक स्टेडियम में खेले जाएंगे। समापन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री अयोध्या पाल होंगे। शुक्रवार को खेले गये प्री क्वार्टर फाइनल व क्वार्टर फाइनल मैचों में महाराष्ट्र की टीमों ने जहां शानदार प्रदर्शन किया वहीं पुरुष वर्ग में रेलवे, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा महिलाओं में पाण्डिचेरी, केरल व पंजाब की खिलाड़ियों का प्रदर्शन अति सराहनीय रहा। कयास यही लगाये जा रहे है कि महाराष्ट्र की टीम खिताब पर कब्जा जमाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी।
..तुम्ही सो गये दास्तां कहते कहते
बलिया: बड़े शौक से सुन रहा था जमाना तुम्ही सो गये दास्तां कहते कहते..। हर एक की जुबान पर यही अल्फाज थे। शुक्रवार को पोस्टमार्टम हाउस पर आये हर उस शख्स की आंखें नम थीं जो उन्हे करीब से जानता था। बात हो रही है मध्य प्रदेश खो-खो टीम के मैनेजर एमएस भट्ट की जिनकी मौत को चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम के बाद सामान्य बताया है। सीनियर नेशनल खो-खो चैम्पियनशिप के अंतर्गत चौथे दिन का खेल प्रारम्भ होने से पहले आयोजन समिति के पदाधिकारियों के अलावा देश के कोने-कोने से आये खिलाड़ियों व खेल जगत से जुड़े लोगों द्वारा उन्हे भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। पोस्टमार्टम हाउस पर उनके परिजन देर शाम को पहुंचे। उसके बाद उनके शव को जबलपुर ले जाने की कवायद शुरू हुई। इस मौके पर मध्यप्रदेश के खिलाड़ी भी मौजूद रहे।
Saturday, September 5, 2009
Thursday, September 3, 2009
किस्मत ने दिया साथ, महिला यूपी टीम ने रचा इतिहास !
बलिया। उत्तर प्रदेश की महिला टीम ने आज 43 वीं सीनियर नेशनल खो-खो चैम्पियनशिप में बलिया की 'चैम्पियन' बालाओं के शानदार प्रदर्शन के बलबूते अपने अंतिम लीग मैच में आन्ध्र प्रदेश को पटकनी देते हुए अगले दौर में प्रवेश किया। कहना गलत न होगा कि किस्मत ने भी उनका भरपूर साथ निभाया। खो-खो जगत में महिला टीम की इस उपलब्धि को इसलिये भी विशेष महत्व दिया जा रहा कि दक्षिण भारत की किसी भी टीम पर उसकी ये पहली जीत है। अब तक हुए मुकाबलों में उत्तर प्रदेश की महिला टीम को हमेशा हार ही गले लगानी पड़ी। पिछली सीनियर नेशनल खो-खो चैम्पियनशिप की अगर बात करे तो उस दौरान महिला वर्ग में नौवें स्थान पर रहने वाली यूपी की टीम इस बार अपने ग्रुप में अव्वल रही।
दूसरी ओर पिछले मैचों में अपेक्षाकृत दब कर खेलने वाली यूपी की पुरुष टीम ने महिलाओं से नसीहत ली और अपने प्रदर्शन में अप्रत्याशित सुधार करते हुए जम्मू-कश्मीर की अपेक्षाकृत मजबूत समझी जा रही टीम को लगभग हर क्षेत्र में बौना साबित कर दिया। दूसरे सत्र में पूर्व मंत्री व विधायक अम्बिका चौधरी ने आयोजन समिति के अध्यक्ष एसबीएन तिवारी के साथ खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर पुरुष वर्ग में उत्तर प्रदेश व जम्मू-कश्मीर के बीच मैच का शुभारम्भ किया। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार उपाध्याय, कबड्डी संघ के अध्यक्ष इं. अरुण कुमार सिंह, आयोजन सचिव विनोद कुमार सिंह, कोआर्डिनेटर अरविन्द सिंह, क्रीड़ा अधिकारी राजेश कुमार सोनकर, सहायक प्रशिक्षक देवी प्रसाद, शिवा नंद, संजय सिंह, मनोज पाण्डेय आदि भी मौजूद रहे। इस दौरान भृगु बाबा के नाम के जयकारे भी खूब लगे।
खो-खो: सारे खेलों की जननी
बलिया: पारम्परिक खेल खो-खो सारे खेलों की जननी है। इससे पैर के अंगूठे के नाखून से लेकर सिर के बाल तक शरीर के सभी अंगों की कसरत हो जाती है। विभिन्न सर्वेक्षणों के अलावा खेल विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि कर चुकी है। अब तो चिकित्सक भी सलाह देने लगे है कि तन्दुरुस्त रहना है तो खो-खो खेलो।
बता दें कि इसकी शुरूआत 1960 में मुम्बई से हुई थी। इसके संस्थापक के रूप में मध्यप्रदेश के थुब्बे, हैदराबाद के ओंकार प्रसाद, कर्नाटक के बीएन शंकर नारायण एवं चन्द्र मौली, मुम्बई के अब्बा नाइक, अम्बेकर, भाई निरूलकर, दिल्ली के केडी गौतम, नागपुर के बीएल आकरे ने इस खेल को धरातल पर मूर्त रूप दिया।
आटया-पाटया व खो-खो एक दूसरे के पूरक
बलिया: महाराष्ट्र में प्रचलित आटया-पाटया खेल का प्रतिरूप है खो-खो। अंतर सिर्फ इतना ही है कि खो-खो के मैदान में जहां दोनों तरफ खम्भे लगे होते है वहीं आटया-पाटया में पोल नहीं होते। दूसरी बात खो-खो मैचों में तीन खिलाड़ी रनिंग करते है जबकि आटया-पाटया में एक खिलाड़ी रनिंग करता है। शाहू जी महाराज कोल्हापुर के जमाने में आटया-पाटया खेल का प्रचलन कुछ ज्यादा ही रहा।
दूसरी ओर पिछले मैचों में अपेक्षाकृत दब कर खेलने वाली यूपी की पुरुष टीम ने महिलाओं से नसीहत ली और अपने प्रदर्शन में अप्रत्याशित सुधार करते हुए जम्मू-कश्मीर की अपेक्षाकृत मजबूत समझी जा रही टीम को लगभग हर क्षेत्र में बौना साबित कर दिया। दूसरे सत्र में पूर्व मंत्री व विधायक अम्बिका चौधरी ने आयोजन समिति के अध्यक्ष एसबीएन तिवारी के साथ खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर पुरुष वर्ग में उत्तर प्रदेश व जम्मू-कश्मीर के बीच मैच का शुभारम्भ किया। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार उपाध्याय, कबड्डी संघ के अध्यक्ष इं. अरुण कुमार सिंह, आयोजन सचिव विनोद कुमार सिंह, कोआर्डिनेटर अरविन्द सिंह, क्रीड़ा अधिकारी राजेश कुमार सोनकर, सहायक प्रशिक्षक देवी प्रसाद, शिवा नंद, संजय सिंह, मनोज पाण्डेय आदि भी मौजूद रहे। इस दौरान भृगु बाबा के नाम के जयकारे भी खूब लगे।
खो-खो: सारे खेलों की जननी
बलिया: पारम्परिक खेल खो-खो सारे खेलों की जननी है। इससे पैर के अंगूठे के नाखून से लेकर सिर के बाल तक शरीर के सभी अंगों की कसरत हो जाती है। विभिन्न सर्वेक्षणों के अलावा खेल विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि कर चुकी है। अब तो चिकित्सक भी सलाह देने लगे है कि तन्दुरुस्त रहना है तो खो-खो खेलो।
बता दें कि इसकी शुरूआत 1960 में मुम्बई से हुई थी। इसके संस्थापक के रूप में मध्यप्रदेश के थुब्बे, हैदराबाद के ओंकार प्रसाद, कर्नाटक के बीएन शंकर नारायण एवं चन्द्र मौली, मुम्बई के अब्बा नाइक, अम्बेकर, भाई निरूलकर, दिल्ली के केडी गौतम, नागपुर के बीएल आकरे ने इस खेल को धरातल पर मूर्त रूप दिया।
आटया-पाटया व खो-खो एक दूसरे के पूरक
बलिया: महाराष्ट्र में प्रचलित आटया-पाटया खेल का प्रतिरूप है खो-खो। अंतर सिर्फ इतना ही है कि खो-खो के मैदान में जहां दोनों तरफ खम्भे लगे होते है वहीं आटया-पाटया में पोल नहीं होते। दूसरी बात खो-खो मैचों में तीन खिलाड़ी रनिंग करते है जबकि आटया-पाटया में एक खिलाड़ी रनिंग करता है। शाहू जी महाराज कोल्हापुर के जमाने में आटया-पाटया खेल का प्रचलन कुछ ज्यादा ही रहा।
Wednesday, September 2, 2009
उत्तर प्रदेश की बालाओं के आगे राजस्थान ने मैदान छोड़ा !
बलिया। चन्द्रशेखर ट्राफी के लिए खेली जा रही 43 वीं सीनियर नेशनल खो-खो चैम्पियनशिप का दूसरा दिन विशेष कर उत्तर प्रदेश की महिला खिलाड़ियों के नाम रहा। आज दूसरे सत्र में राजस्थान के खिलाफ हुए मुकाबले में यूपी की बालाओं का शानदार प्रदर्शन सुर्खियों में रहा। आलम ये रहा कि विपक्षी टीम मैदान छोड़ने को मजबूर हो गयी। अंतत: यूपी ने यह मुकाबला एक पाली व 16 अंकों से जीत लिया।
वीर लोरिक स्टेडियम में आयोजित इस चैम्पियनशिप के अंतर्गत आज खेले गये मैचों में विदर्भ, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, चण्डीगढ़, तेलंगाना की टीमें महिला वर्ग में विजयी रहीं जबकि पुरुषों के मुकाबले में विदर्भ के अलावा केरल, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, कर्नाटक, दिल्ली, रेलवे , चण्डीगढ़, गोवा, हरियाणा व छत्तीसगढ़ की टीमों ने भी अपने मैच जीत कर पूरे अंक हासिल कर लिये लेकिन इन सबके बीच महफिल लूटी तो यूपी की महिलाओं ने। कप्तान मृगेंदु की अगुवाई में इस टीम की खिलाड़ियों की फ्लाइंग व पोल डाइविंग के साथ ही उनकी चपलता व बिजली सी फुर्ती के आगे विपक्षी टीम की एक न चली। उमड़े हुजूम की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अकेले मृगेंदु ने अपनी टीम के लिए एक दर्जन अंक बटोरे। सायं काल स्टेडियम में पहुंचे भारतीय खो-खो फेडरेशन के चेयरमैन राजीव मेहता ने भी भारतीय खेल प्राधिकरण के परियोजना निदेशक एमएस त्यागी के साथ खिलाड़ियों की हौसला आफजाई की।
वीर लोरिक स्टेडियम में आयोजित इस चैम्पियनशिप के अंतर्गत आज खेले गये मैचों में विदर्भ, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, चण्डीगढ़, तेलंगाना की टीमें महिला वर्ग में विजयी रहीं जबकि पुरुषों के मुकाबले में विदर्भ के अलावा केरल, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, कर्नाटक, दिल्ली, रेलवे , चण्डीगढ़, गोवा, हरियाणा व छत्तीसगढ़ की टीमों ने भी अपने मैच जीत कर पूरे अंक हासिल कर लिये लेकिन इन सबके बीच महफिल लूटी तो यूपी की महिलाओं ने। कप्तान मृगेंदु की अगुवाई में इस टीम की खिलाड़ियों की फ्लाइंग व पोल डाइविंग के साथ ही उनकी चपलता व बिजली सी फुर्ती के आगे विपक्षी टीम की एक न चली। उमड़े हुजूम की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अकेले मृगेंदु ने अपनी टीम के लिए एक दर्जन अंक बटोरे। सायं काल स्टेडियम में पहुंचे भारतीय खो-खो फेडरेशन के चेयरमैन राजीव मेहता ने भी भारतीय खेल प्राधिकरण के परियोजना निदेशक एमएस त्यागी के साथ खिलाड़ियों की हौसला आफजाई की।
अनुशासन ही कामयाबी की कुंजी: डीएम !
बलिया। किसी भी इंसान की कामयाबी में अनुशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। खेल जगत में तो इसके बिना सफलता हासिल की ही नहीं जा सकती। खिलाड़ियों को इसे अपने आचरण में आत्मसात करना होगा।
यह बातें जिलाधिकारी सेंथिल पाण्डियन सी ने कही। सेंट जेवियर्स स्कूल धरहरा में सीनियर नेशनल खो-खो चैम्पियनशिप के अंतर्गत महिला वर्ग में आन्ध्र प्रदेश व राजस्थान के बीच खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त करने से पूर्व उद्घाटन की औपचारिकताएं पूरी करने के क्रम में उन्होंने इस आयोजन को भव्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि बलिया में इस तरह का आयोजन वाकई गर्व की बात है। इस मैच में आन्ध्र प्रदेश की टीम ने विपक्षी टीम को एक पाली व तेरह अंकों से पराजित कर दिया। यहीं खेले गये दूसरे मैच में गुजरात की टीम को विदर्भ ने एक पाली व चार अंकों से शिकस्त दी।
दूसरी ओर वीर लोरिक स्टेडियम में मुकाबलों का दौर आज भी जारी रहा। देश के कोने-कोने से आये खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखने के लिए हजारों का हुजूम यहां डेरा डाले रहा। सायं कालीन सत्र में भारतीय खेल प्राधिकरण के परियोजना निदेशक एमएस त्यागी के साथ भारतीय खो-खो फेडरेशन के चेयरमैन राजीव मेहता की मौजूदगी ने मुकाबले में चार चांद लगा दिये। आयोजन समिति के अध्यक्ष एसबीएन तिवारी व वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार उपाध्याय के अलावा आयोजन सचिव विनोद कुमार सिंह, कोआर्डिनेटर अरविन्द सिंह, क्रीड़ा अधिकारी राजेश कुमार सोनकर, सहायक प्रशिक्षक देवी प्रसाद, नीरज राय, पवन राय आदि व्यवस्था की कमान सम्भाले रहे।
यह बातें जिलाधिकारी सेंथिल पाण्डियन सी ने कही। सेंट जेवियर्स स्कूल धरहरा में सीनियर नेशनल खो-खो चैम्पियनशिप के अंतर्गत महिला वर्ग में आन्ध्र प्रदेश व राजस्थान के बीच खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त करने से पूर्व उद्घाटन की औपचारिकताएं पूरी करने के क्रम में उन्होंने इस आयोजन को भव्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि बलिया में इस तरह का आयोजन वाकई गर्व की बात है। इस मैच में आन्ध्र प्रदेश की टीम ने विपक्षी टीम को एक पाली व तेरह अंकों से पराजित कर दिया। यहीं खेले गये दूसरे मैच में गुजरात की टीम को विदर्भ ने एक पाली व चार अंकों से शिकस्त दी।
दूसरी ओर वीर लोरिक स्टेडियम में मुकाबलों का दौर आज भी जारी रहा। देश के कोने-कोने से आये खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखने के लिए हजारों का हुजूम यहां डेरा डाले रहा। सायं कालीन सत्र में भारतीय खेल प्राधिकरण के परियोजना निदेशक एमएस त्यागी के साथ भारतीय खो-खो फेडरेशन के चेयरमैन राजीव मेहता की मौजूदगी ने मुकाबले में चार चांद लगा दिये। आयोजन समिति के अध्यक्ष एसबीएन तिवारी व वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार उपाध्याय के अलावा आयोजन सचिव विनोद कुमार सिंह, कोआर्डिनेटर अरविन्द सिंह, क्रीड़ा अधिकारी राजेश कुमार सोनकर, सहायक प्रशिक्षक देवी प्रसाद, नीरज राय, पवन राय आदि व्यवस्था की कमान सम्भाले रहे।
Tuesday, September 1, 2009
चन्द्रशेखर ट्राफी: बलिया में खो-खो का महाकुम्भ शुरू !
बलिया। स्वाइन फ्लू की झंझट व अन्य तमाम व्यवधानों को पार करते हुए चन्द्रशेखर ट्राफी के लिए मंगलवार को यहां वीर लोरिक स्टेडियम में 43 वीं सीनियर नेशनल खो-खो चैम्पियनशिप की शुरूआत हो ही गयी। भारतीय खो-खो फेडरेशन के निर्देशन व उत्तर प्रदेश खो-खो एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित इस चैम्पियनशिप का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि भारतीय खेल प्राधिकरण के परियोजना निदेशक एमएस त्यागी ने भारतीय खो-खो फेडरेशन के चेयरमैन कमलेश चटर्जी की मौजूदगी में किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि श्री त्यागी ने अपने सम्बोधन में कहा कि अनुशासन ही सफलता की कुंजी है। इसके बिना कोई भी खिलाड़ी आगे बढ़ नहीं सकता। आवश्यकता इसे अपने आचरण में समाहित करने की है। उन्होंने खिलाड़ियों का आह्वान किया कि वे इस चैम्पियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए इसे ऐतिहासिक बनायें।
सांसद नीरज शेखर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस चैम्पियनशिप का बलिया का आयोजन उनके लिए गौरव की बात है। खास बात यह कि इसका आयोजन उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की स्मृति में किया जा रहा है। उन्होंने इस चैम्पियनशिप को बलिया की गरिमा के अनुरूप सम्पन्न कराने में हर सम्भव सहयोग देने का वायदा किया। उन्होंने कहा कि बलिया में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं आवश्यकता इन्हे सामने लाकर आगे बढ़ाने की है।
इस मौके पर विभिन्न खेल संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के साथ राजनीतिक क्षेत्र के लोगों की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही। इनमें कमलेश सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष उपेंद्र तिवारी, कविलाश सिंह, राणा सिंह, विनोद सिंह, दीपक सिंह, नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक कपिल देव, राजन, सेलटैक्स कमिश्रन्र राम प्रवेश, आरडी सिंह आदि मौजूद रहे।
सांसद नीरज शेखर ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस चैम्पियनशिप का बलिया का आयोजन उनके लिए गौरव की बात है। खास बात यह कि इसका आयोजन उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की स्मृति में किया जा रहा है। उन्होंने इस चैम्पियनशिप को बलिया की गरिमा के अनुरूप सम्पन्न कराने में हर सम्भव सहयोग देने का वायदा किया। उन्होंने कहा कि बलिया में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं आवश्यकता इन्हे सामने लाकर आगे बढ़ाने की है।
इस मौके पर विभिन्न खेल संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के साथ राजनीतिक क्षेत्र के लोगों की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही। इनमें कमलेश सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष उपेंद्र तिवारी, कविलाश सिंह, राणा सिंह, विनोद सिंह, दीपक सिंह, नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक कपिल देव, राजन, सेलटैक्स कमिश्रन्र राम प्रवेश, आरडी सिंह आदि मौजूद रहे।
सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा जरूरी: इन्द्रजीत !
सड़ा (बलिया), निप्र । बालिकाओं को शिक्षित बनाकर ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। अभिभावकों का दायित्व है कि वे अपनी बच्चियों को शिक्षित बनाकर राष्ट्र के नव निर्माण में अपना योगदान अंकित करावें।
उक्त उद्गार मंदा ग्राम के प्रधान प्रतिनिधि इन्द्रजीत सिंह ने मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय मंदा पर आयोजित समारोह में 109 छात्राओं को ड्रेस वितरण के उपरान्त व्यक्त कियं। उन्होंने कहा कि समाज में लड़के-लड़कियों के बीच व्याप्त भेद को समाप्त कर नयी परम्परा की शुरूआत से ही देश को खुशहाल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में लड़कियां खेल, प्रौद्योगिकी विज्ञान, नौकरी सहित तमाम क्षेत्र में लड़कों से आगे बढ़ कर सफलता हासिल कर रही हैं। ऐसे में अभिभावकों का दायित्व बनता है कि वे सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए बालिकाओं को शिक्षित बनावें।
इस मौके पर सहायक अध्यापक सुरेश मसीह, विजय प्रधान अजीजपुर खड़सरा, विवेकानन्द यादव, विक्रमा सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किया। संचालन प्रधानाध्यापक अशगरी खातून ने किया।
उक्त उद्गार मंदा ग्राम के प्रधान प्रतिनिधि इन्द्रजीत सिंह ने मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय मंदा पर आयोजित समारोह में 109 छात्राओं को ड्रेस वितरण के उपरान्त व्यक्त कियं। उन्होंने कहा कि समाज में लड़के-लड़कियों के बीच व्याप्त भेद को समाप्त कर नयी परम्परा की शुरूआत से ही देश को खुशहाल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में लड़कियां खेल, प्रौद्योगिकी विज्ञान, नौकरी सहित तमाम क्षेत्र में लड़कों से आगे बढ़ कर सफलता हासिल कर रही हैं। ऐसे में अभिभावकों का दायित्व बनता है कि वे सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए बालिकाओं को शिक्षित बनावें।
इस मौके पर सहायक अध्यापक सुरेश मसीह, विजय प्रधान अजीजपुर खड़सरा, विवेकानन्द यादव, विक्रमा सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किया। संचालन प्रधानाध्यापक अशगरी खातून ने किया।
भौतिकता की आंधी में ध्वस्त हुई ज्ञान दृष्टि: हरिहरानंद !
चितबड़ागांव (बलिया), निप्र । भौतिकता की आंधी ने मानव समाज की ज्ञान दृष्टि को धूल धूसरित कर दिया है, यही कारण है कि किसी भी काल परिस्थिति में साधन का कार्य करने वाले अर्थ को साध्य समझने की भूल हो रही है।
उक्त विचार चितबड़ागांव के चित्तेश्वरनाथ मंदिर पर उपस्थित श्रद्धालु जन को सम्बोधित करते हुए संत हरिहरानन्द स्वामी ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कलियुग में मानव के ज्ञान चक्षु को खोलने एवं सन्मार्ग की ओर उन्मुख करने के लिए रामनाम संकीर्तन ही एक मात्र सहारा है।
संत हरिहरानन्द स्वामी की प्रेरणा से अति प्राचीन चित्तेश्वरनाथ मंदिर पर 15 माह तक चलने वाले अखण्ड रामनाम संकीर्तन यज्ञ आयोजित है। फरवरी 09 से प्रारम्भ अखण्ड रामनाम संकीर्तन यज्ञ की पूर्णाहुति मई 2010 में निश्चित की गयी है। स्वामी जी के आगमन पर प्रफुल्लित जन समुदाय ने हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए कतारबद्ध होकर संत शिरोमणि पर पुष्प वर्षा की। संकीर्तन में महिलाओं की भारी संख्या में उपस्थिति एवं लयबद्ध संकीर्तन से नगर का वातावरण देवमय हो गया है।
उक्त विचार चितबड़ागांव के चित्तेश्वरनाथ मंदिर पर उपस्थित श्रद्धालु जन को सम्बोधित करते हुए संत हरिहरानन्द स्वामी ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कलियुग में मानव के ज्ञान चक्षु को खोलने एवं सन्मार्ग की ओर उन्मुख करने के लिए रामनाम संकीर्तन ही एक मात्र सहारा है।
संत हरिहरानन्द स्वामी की प्रेरणा से अति प्राचीन चित्तेश्वरनाथ मंदिर पर 15 माह तक चलने वाले अखण्ड रामनाम संकीर्तन यज्ञ आयोजित है। फरवरी 09 से प्रारम्भ अखण्ड रामनाम संकीर्तन यज्ञ की पूर्णाहुति मई 2010 में निश्चित की गयी है। स्वामी जी के आगमन पर प्रफुल्लित जन समुदाय ने हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए कतारबद्ध होकर संत शिरोमणि पर पुष्प वर्षा की। संकीर्तन में महिलाओं की भारी संख्या में उपस्थिति एवं लयबद्ध संकीर्तन से नगर का वातावरण देवमय हो गया है।
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