Thursday, December 22, 2011
बलिया का दुर्गेश प्रदेश थ्रो बाल टीम में !
Monday, December 19, 2011
कर्म की महत्ता बताने पृथ्वी पर आते हैं भगवान !

मानव जाति को सत् मार्ग से विमुख करने वाले असुर प्रवृतियों को तो भगवान बैकुण्ठ में बैठे-बैठे ही समाप्त कर सकते हैं पर बार-बार धरती पर आकर वे धर्म की महत्ता को सिद्ध करते हैं। उक्त बातें श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन सोमवार को रामानुजाचार्य जगतगुरु स्वामी श्रीधराचार्य जी महराज ने प्रवचन के दौरान कहीं। रामलीला मैदान के प्रांगण में श्री बलिया सत्संग सेवा समिति के बैनर तले आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में उमड़े भक्तों के सैलाब के समक्ष संत श्री ने कहा कि जब-जब धर्म की क्षति व मानव को अपने कर्म की राह में विमुख करने वाली शक्तियों का प्रादुर्भाव हुआ भगवान को धरती पर आना पड़ा। भगवान का रामावतार कर्मयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है। कथा में संतश्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म और बालपन की लीलाओं का वर्णन कर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूतना वध के प्रसंग को भी बड़े मनोहर ढंग से प्रस्तुत किया। कृष्ण के अवतार को बताते हुए कहा कि कंस ने जब मानवता को खत्म करने का प्रयास किया तो भगवान को अवतार लेना पड़ा। कंस के सहभागियों को बारी-बारी मारकर भगवान ने यह बताने का भी प्रयास किया कि बुराई एक बार में ही समाप्त नहीं होती उसे व्यवस्था से भगाना पड़ता है। कथा के यजमान डीपी ज्वेलर्स रहे।
दो कुल संवारती हैं बेटियां
भागवत कथा के दौरान संत श्री ने समाज की एक प्रमुख बुराई भ्रूण हत्या पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि आज के लोग कोख में बेटियों को मारने से परहेज नहीं कर रहे पर वे भूल जाते हैं कि बेटा कितना भी लायक हो तो एक कुल का ही मान बढ़ाता है किन्तु काबिल बेटी दो कुलों को सुशोभित करती है।
निकाली कृष्ण जन्म की झांकी
श्रीमद् भगवत कथा के चौथे दिन शाम को संत श्रीधराचार्य के साथ आयी टीम ने भगवान श्री कृष्णा के जन्म की मनोहर झांकी प्रस्तुत की।
Sunday, December 18, 2011
कभी भक्त वत्सल को सच्चे दिल से बुलाओ तो !!!!!
Thursday, December 1, 2011
रामचरित मानस कहने व सुनने मात्र से सुधर जाता इहलोक- परलोक !
श्री रामचरितमानस पाठ के कहने सुनने मात्र से लोगों का इहलोक व परलोक दोनों सुधर जाता है। यही एक मात्र ग्रंथ है जिनके कहने से उस स्थल पर कथा श्रवण करने कोई आये या न आये किन्तु श्री हनुमत लाल जी अवश्य आते हैं। स्थानीय श्री नाथ मठ पर आयोजित श्री राम कथा सत्संग व मानस प्रवचन के पांचवें दिन बुधवार को जालौन से पधारे श्री माधवादासचार्य जी ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए उक्त उद्गार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि पुत्र को जहां आज्ञाकारी होना चाहिए वहीं पत्नी को अपने पति की मर्यादा की रक्षा में सर्वस्व न्यौछावर कर देना चाहिए। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण श्रीराम व सीता को देते हुए उन्होंने कहा कि अगर श्रीराम आज्ञाकारी पुत्र न होते तो आज उन्हें कौन जानता। श्री राम के वन गमन में ही उनकी प्रसिद्धी छिपी थी और मां जानकी सहित उर्मिला आदि पति के दु:खों में साथी बन कर ही पूजी जाती हैं। झांसी से पधारीं प्रज्ञा भारती ने हनुमान की वीरता और भक्ति भरे प्रसंगों की चर्चा करते हुए श्रीराम का प्रिय भक्त बताया तथा निवेदन किया कि भक्तों को हनुमान जी के जीवनी से प्रेरणा लेकर अहंकार रहित भक्त बनना चाहिए। भजना नंदी श्याम देव चौबे ने भी भजनों के माध्यम से शिव महादेव की चर्चा कर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के यज्ञाचार्य पं.राकेश चौबे रहे।
Thursday, November 24, 2011
राष्ट्रीय विकलांग तैराकी में जलवा दिखाएगा बलिया का लक्ष्मी साहनी !
Monday, November 21, 2011
ज्ञानदीप से आलोकित हो रहा तकनीकी शिक्षा जगत !
ददरी मेले के भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस हलकान !
ऐतिहासिक ददरी मेले के मीना बाजार में छुट्टी के दिन रविवार को लोगों की काफी भीड़ रही। लोगों ने सामानों की जमकर खरीदारी की। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस पूरे दिन कसरत करती रही। ग्रामीण क्षेत्र के लोग सुबह 9 बजे ही मेले में पहुंच गये। दोपहर बाद तो मेले में काफी भीड़ हो गयी। लोग एक दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ते रहे। झूला, जादू, डांस आइटमों पर युवा वर्ग की जमात अपने नंबर का इंतजार करती रही। मेले में पहली बार इतनी भीड़ देखी गयी। लोगों ने सामान की खरीदारी तो की ही, विभिन्न आइटमों का भी आनंद लेते रहे। महिलाओं ने घरेलू व अपने श्रृंगार के सामान की खरीदारी की। गरम कपड़ों की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ लगी रही। मेले में दोपहर बाद शहर व आसपास के लोग भी वाहनों से अपने परिवार के साथ निकल पड़े। मेले में उमड़ी भीड़ को देख दुकानदारों के भी चेहरे चहक गये थे। नगर पालिका ने मेले में दुकानों की संख्या बढ़ा दी है। मेले के दोनों मार्गो के बीच मे भी ठेला समेत फुटपाथ की दुकानें लगी हैं। मेला प्रभारी विमलेंदु अपने सहयोगियों के साथ कभी पैदल तो कभी घोड़े पर सवार होकर भीड़ को नियंत्रित करते रहे। वहीं चर्खी व अन्य आइटमों के पास पुलिस के जवान काफी सतर्क दिखे।
बिछड़ों को मिलाती रही पुलिस
मेले में बिछड़ों को उनके परिजनों से पुलिस मिलाती रही। इसके लिए तीन जवान पूरी तरह से डटे रहे। मेले के अंदर सबसे अधिक बच्चे परिवारवालों से बिछड़े। पुलिस ने करीब एक दर्जन बिछड़ों को उनके परिवार वालों से मिलाया। दुबहर थाना क्षेत्र के बैजनाथ छपरा निवासी बृजेश यादव की पुत्री कुसुम यादव (5) अपनी मां से बिछड़ गयी थी। इसको लेकर जवान काफी परेशान रहे। मेले में माइक से इसकी सूचना प्रसारित की गयी। काफी प्रयास के बाद उस लड़की की एक परिचित महिला मिली। देर शाम को उसके परिवार वाले पहुंच गये।
फ्री आइटम व सेल सामानों की लूट
मेले में एक से एक आइटम आये हुए हैं। इसमें बाम्बे की साड़ी की दुकान पर दस खरीदने पर एक फ्री, एक की कीमत 75 रुपये पर लूट सी मची रही। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने इसकी खूब खरीदारी की। कुछ इसी तरह की छूट कंघी, बैग, कप, गिलास समेत आदि सामान पर भी रही। वहीं हरेक माल दस रुपये व 25 रुपये की दुकानों पर भी भीड़ रही। इसके अलावा सेल के सामान की दुकानों पर भी लूट मची रही।
झूले पर खड़े होनेवालों की अब खैर नहीं
मेले में लगे चर्खी पर खड़े होकर झूलने वालों की अब खैर नहीं। तीन दिन पूर्व झूले से युवक व युवती के गिरने की घटना को देखते हुए पुलिस ने यह सख्त कदम उठाया है। मेला प्रभारी विमलेंदु ने बताया कि इसके लिए झूले वालों को भी निर्देश दिया गया है।
लकड़ी के सामानं की हुई खूब बिक्री
ददरी मेला के मीना बाजार में लकड़ी के बने सामानों की जमकर बिक्री हो रही है। इसके अलावा लोग बड़े-बड़े बक्सों की खरीदारी में भी दिलचस्पी ले रहे हैं। मेले में लोगों ने जमकर खरीदारी की। साथ ही फूल-पौधे भी ले गये। इन दिनों मेला पूरे शबाब पर है। मेले में कानपुर व सहारनपुर समेत अन्य जनपदों के व्यापारी लकड़ी की दुकानें लगाये हुए हैं। पलंग, चौकी, मेज, सोफा सहित अन्य सामान की खरीदारी कुछ ज्यादा ही हो रही है। मेले में आलमारी, छोटे-बड़े बक्से की दुकानें भी लगी हैं। गांव से आये लोगों ने इन सामानों की खरीदारी में ज्यादा रुचि दिखायी।