विद्यालयों में शिक्षा के साथ ही खेलकूद संबंधी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाय। बिना इसके प्रतिभावान खिलाड़ी सामने नहीं आ सकेंगे। यह बातें जिला विद्यालय निरीक्षक योगेंद्र सिंह ने कही। वह बुधवार को यहां कुंवर सिंह इण्टर कालेज के परिसर में क्रीड़ा समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। माध्यमिक विद्यालयों के जनपदीय क्रीड़ा समारोह की बाबत उन्होंने कहा कि एथलेटिक्स की प्रतियोगिता नवम्बर में आयोजित की जायेगी। इस क्रम में अन्य खेलों की प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम भी बहुत जल्द निर्धारित कर दिया जायेगा। उन्होंने बैठक में मौजूद प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया कि इसकी तैयारी प्रारम्भ कर दी जाय ताकि क्रीड़ा समारोह को भव्यता प्रदान की जा सके। बैठक में जगदीश ओझा, विजय कांत सिंह, डा.विश्वरंजन सिंह, चन्द्रशेखर उपाध्याय आदि ने विचार रखे। संचालन प्रधानाचार्य अवधेश सिंह ने किया।
विधान चन्द्र बने क्रीड़ा सचिव
कुंवर सिंह इण्टर कालेज के परिसर में हुई क्रीड़ा समिति की बैठक में समिति के पदाधिकारियों का चुनाव किया गया। पदेन अध्यक्ष जिला विद्यालय निरीक्षक योगेंद्र सिंह ने बताया कि विधान चन्द्र राय को सचिव की जिम्मेदारी दी गयी है जबकि अब तक इस पद की जिम्मेदारी सम्भालने वाले हरेद्र सिंह समिति के संरक्षक होंगे। इस क्रम में मेजर दिनेश सिंह, अखिलेश कुमार सिंह, विष्णुदेव राय के अलावा प्रधानाचार्य जीआईसी, जीजीआईसी व गुलाब देवी इण्टर कालेज को उपाध्यक्ष बनाया गया। रमेश चन्द्र श्रीवास्तव को उप सचिव, डा.प्रदीप श्रीवास्तव को कोषाध्यक्ष, अशोक कुमार सिंह को उप कोषाध्यक्ष, शैलेंद्र कुमार सिंह को आय व्यय निरीक्षक, राज नारायण राय व अजय कुमार पाण्डेय को प्रचार मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गयी वहीं अरुण कुमार शुक्ल को जनपदीय क्रीड़ा प्रभारी नियुक्त किया गया।
Thursday, September 30, 2010
Saturday, September 25, 2010
पितरों की श्रद्धा के साथ की गयी पूजा शीघ्र होती फलित !
हिन्दू धर्म में श्राद्ध का अत्यधिक महत्व है। भाद्र पद पूर्णिमा से आश्रि्वन कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि तक श्राद्ध पक्ष कहलाता है। क्षेत्र के शुभनथही निवासी पं.कौशल कुमार मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष में पितृ गणों की प्रसन्नता के लिए उनकी श्राद्ध करने की धार्मिक मान्यता है। श्राद्ध 12 प्रकार के होते है। पितृगणों की श्रद्धा-आस्था व विश्वास के साथ की गई पूजा शीघ्र फलित होती है जिससे भौतिक सुख-समृद्ध, वैभव, यश सफलता आदि प्राप्त होती है। सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त होता है। यह पूजन कार्य कर्मकाण्डी पंडितों से करवाना चाहिए। अमावस्या तिथि को सभी पितरों का श्राद्ध करने का विधान है। श्राद्ध सम्बन्धित कृत्य मध्याह्न काल में करना उत्तम होता है और सूर्यास्त के बाद श्राद्ध करने का विधान है। श्राद्ध में मुख्य रूप से तीन कार्य किये जाते है यथा पिंडदान, तर्पण व ब्राह्मण भोजन। श्राद्ध में सम्बन्धित ब्राह्मणों को भोजन कराने की प्रथा है। ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद उनको वस्त्र, पात्र व यथाशक्ति दक्षिणा देकर उनको प्रसन्न करके विदाई करना चाहिए। इसके साथ ही गौ व कौवों को भी भोजन खिलाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन सब श्राद्ध की कृत्यों को करने पर पितृगण प्रसन्न होते है। उनसे हमें आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। पितृपक्ष में भोजन शुद्ध, सात्विक व शाकाहारी बनाया जाता है। इसमें लहसुन व प्याज वर्जित है। भोजन में मिष्ठान होना अति आवश्यक है। श्राद्ध वाले दिन सतकृत्यों की ओर मनोवृत्ति होनी चाहिए। ब्रह्मचर्य नियम का पालन करना चाहिए। दिवंगत माता-पिता व पूर्वजों की मृत्यु तिथि को श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध सम्बन्धित सभी कार्य करवाने चाहिए। श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध न होने पर व्यक्ति को नाना प्रकार के कष्ट झेलने पड़ते है। मनोकामना की पूर्ति में बाधा आती है। परिवार में कोई न कोई अस्वस्थ रहता है, संतान सम्बन्धित कष्ट रहते है, वंश वृद्धि नहीं होती। दुर्घटना व असामयिक मौत व अन्य परेशानियां परिवार में देखने को मिलती है। श्राद्ध कृत्य विधान से होने पर समस्त दोषों का निवारण होकर जीवन सुखद बनता है।
Monday, September 6, 2010
सांस्कृतिक कार्यक्रम में जया ने मारी बाजी !
शिक्षा क्षेत्र सोहांव के प्राथमिक विद्यालय बसन्तपुर में सोमवार को नेहरू युवा केन्द्र के संयोजकत्व में आयोजित ब्लाक स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में नेहरू युवा मंडल सेनुरिया की कलाकार जया शर्मा ने 'स्वर्ग में गांधी नेहरू रोई-रोई कहे ई बात हो' गीत गाकर प्रथम स्थान अर्जित किया। मन्नू ठाकुर ने अपने लोकगीत की छठा बिखेर कर दूसरा स्थान व निधि राय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया जबकि बटेश्वर यादव ने पढ़ ऐ भइया पढ़ले में भलाई बा गाकर विशेष स्थान अर्जित किया। निर्णायक की भूमिका में मनोज तिवारी, सुधीर तिवारी, प्रेमचन्द राय व जयशंकर रावत रहे। बतौर मुख्य अतिथि जिला पंचायत राज अधिकारी जंग बहादुर सिंह ने विजेताओं को पुरस्कृत करने के बाद कहा कि भोजपुरी लोकगीत के अन्तर्राष्ट्रीय कलाकारों की जननी गड़हा क्षेत्र की लोक परम्परा बहुत ही समृद्ध है इसीलिए आज भी जनपद के अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा गड़हाचंल में काफी नवोदित कलाकार हैं। आभार नेहरू युवा के समन्वयक कपिल देव ने व्यक्त किया। संचालन शत्रुघ्न राय ने किया।
Sunday, September 5, 2010
भाव में भक्तों के लिए नियम तोड़ देते भगवान!!
भागवत कथा वाचक अनुराग कृष्ण शास्त्री 'कन्हैया' जी ने कहा कि भगवान प्रेममयी है। वह भाव के भूखे रहते हैं। सच्चे मन से याद करने पर वह भक्तों के लिए अपने नियम बदल कर रक्षा के लिय आ जाते हैं।
श्री कन्हैया नगर के रामलीला मैदान में प्रभात फेरी सेवा संस्थान के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन रविवार को सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित भक्तों के बीच बोल रहे थे। कहा कि ब्राह्माणों को दान देने से धन बढ़ता है। आदमी को हमेशा अच्छे कर्म करते रहना चाहिए। नर्क व स्वर्ग की चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य जैसा कर्म करता है उसका फल यहीं भोगता है। भगवान को हमेशा अपने कर्म के बल पर प्रसन्न करने वाला भक्त ही सफल होता है। इसके पूर्व कथा की शुरूआत भागवत भगवान की आरती से हुई। भक्तों की सेवा भाव व व्यवस्था में राकेश कुमार गुप्त, केदार नाथ, मनोज कुमार, राकेश कुमार अग्रवाल, हृदया नंद चौधरी, सुशील अग्रवाल, सूर्य प्रकाश अग्रवाल, कृष्णकांत तिवारी, राज कुमार मिश्र, लक्ष्मण सिंह आदि लगे रहे। सातवें दिन के यजमान राज किशोर रहे।
श्री कन्हैया नगर के रामलीला मैदान में प्रभात फेरी सेवा संस्थान के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन रविवार को सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित भक्तों के बीच बोल रहे थे। कहा कि ब्राह्माणों को दान देने से धन बढ़ता है। आदमी को हमेशा अच्छे कर्म करते रहना चाहिए। नर्क व स्वर्ग की चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य जैसा कर्म करता है उसका फल यहीं भोगता है। भगवान को हमेशा अपने कर्म के बल पर प्रसन्न करने वाला भक्त ही सफल होता है। इसके पूर्व कथा की शुरूआत भागवत भगवान की आरती से हुई। भक्तों की सेवा भाव व व्यवस्था में राकेश कुमार गुप्त, केदार नाथ, मनोज कुमार, राकेश कुमार अग्रवाल, हृदया नंद चौधरी, सुशील अग्रवाल, सूर्य प्रकाश अग्रवाल, कृष्णकांत तिवारी, राज कुमार मिश्र, लक्ष्मण सिंह आदि लगे रहे। सातवें दिन के यजमान राज किशोर रहे।
आदर्श शिक्षक के रूप में याद किये गये राधाकृष्णन!
शिक्षक दिवस पर रविवार को पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डा.राधाकृष्णन आदर्श शिक्षक के रूप में याद किये गये। इस अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में डा.राधाकृष्णन के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शो पर चलने का संकल्प लिया गया।
टाउन डिग्री कालेज के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर बरमेश्वर पाण्डेय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अवकाश प्राप्त शिक्षक अवध बिहारी चौबे के सम्मान समारोह के अवसर पर कहा कि पश्चिमी संस्कृति की चपेट में आकर व्यावसायिक बनती जा रही शिक्षा को संस्कार के रूप में विकसित नहीं किया गया तो भारतीय संस्कृति व शैक्षणिक वातावरण सदा-सदा के लिए कलुषित हो जायेगा। इस अवसर पर डा.जनार्दन राय ने कहा कि शिक्षा ज्ञान व कर्तव्य की वह अनुकरणीय प्रणाली है जहां भटकती मानवता को दिशा मिलती है तथा अनुसंधानकर्ता को तत्वज्ञान। इस अवसर पर उपस्थित जनों ने सरस्वती व डा.राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम में ध्रुवपति पाण्डेय ध्रुव, डा.देव कुमार सिंह, कैलाश उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
नगर के चन्द्रशेखर नगर स्थित शक्ति स्थल शिशु मंदिर व बालिका हाईस्कूल में आयोजित गोष्ठी में विद्यालय के प्रबन्धक दुर्गादत्त त्रिपाठी ने कहा कि बच्चों के चरित्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका अहम होती है। श्री त्रिपाठी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका अम्बिका त्रिपाठी को अंगवस्त्रम् भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर ओमप्रकाश तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद, संजीव चौबे आदि मौजूद रहे।
सदानन्द शिशु सदन बालिका जूनियर हाईस्कूल जापलिनगंज में शिक्षक दिवस का कार्यक्रम उल्लास पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर अन्नू राय इण्टरमीडिएट कालेज चौरा के प्रधानाचार्य डा. शिवकुमार मिश्र ने कहा कि राधाकृष्णन एक आदर्श शिक्षक के रूप में आजीवन याद किये जायेंगे।
माशिसं पाण्डेय गुट ने मनाया विरोध दिवस
उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ पाण्डेय गुट के शिक्षकों ने भी डा.राधाकृष्णन को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए 4 माह से वेतन न मिलने के कारण शिक्षक दिवस को विरोध दिवस के रूप में मनाया। संघ के प्रान्तीय उपाध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने कहा कि डा.राधाकृष्णन एक आदर्श शिक्षक के साथ ही दर्शन शास्त्र के प्रकांड ज्ञाता थे। द्वितीय राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने अपना जन्म दिवस शिक्षक दिवस के रूप में मना कर शिक्षकों जो सम्मान दिया उसके लिए शिक्षक समाज उनका आजीवन ऋणी रहेगा। इस अवसर पर ज्योति स्वरूप पाण्डेय, डा.डीएन सिंह, सुधाकर पाण्डेय आदि मौजूद रहे।
माशिसं शर्मा गुट ने दिया धरना
माशिसं शर्मा गुट ने शिक्षक दिवस के अवसर पर भृगु मंदिर में धरना दिया। इस दौरान शिक्षकों ने कहा कि अब शिक्षक होना गर्व की बात नहीं। लम्बित वेतन व सीडी जांच के नाम पर हो रहे उत्पीड़न के प्रति अपना गुस्सा अध्यापकों ने दिखाया। साथ ही शिक्षक सुरेन्द्र सिंह पर गैंगस्टर लगाये जाने की तीव्र भर्त्सना की। इस दौरान विष्णुदेव राय, अशोक श्रीवास्तव, शशि कुमार सिंह, रंगनाथ मिश्र, अरविन्द शुक्ल, आदि ने अपनी सहभागिता की। संचालन डा.शिव कुमार मिश्र ने किया।
टाउन डिग्री कालेज के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर बरमेश्वर पाण्डेय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अवकाश प्राप्त शिक्षक अवध बिहारी चौबे के सम्मान समारोह के अवसर पर कहा कि पश्चिमी संस्कृति की चपेट में आकर व्यावसायिक बनती जा रही शिक्षा को संस्कार के रूप में विकसित नहीं किया गया तो भारतीय संस्कृति व शैक्षणिक वातावरण सदा-सदा के लिए कलुषित हो जायेगा। इस अवसर पर डा.जनार्दन राय ने कहा कि शिक्षा ज्ञान व कर्तव्य की वह अनुकरणीय प्रणाली है जहां भटकती मानवता को दिशा मिलती है तथा अनुसंधानकर्ता को तत्वज्ञान। इस अवसर पर उपस्थित जनों ने सरस्वती व डा.राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम में ध्रुवपति पाण्डेय ध्रुव, डा.देव कुमार सिंह, कैलाश उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
नगर के चन्द्रशेखर नगर स्थित शक्ति स्थल शिशु मंदिर व बालिका हाईस्कूल में आयोजित गोष्ठी में विद्यालय के प्रबन्धक दुर्गादत्त त्रिपाठी ने कहा कि बच्चों के चरित्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका अहम होती है। श्री त्रिपाठी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका अम्बिका त्रिपाठी को अंगवस्त्रम् भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर ओमप्रकाश तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद, संजीव चौबे आदि मौजूद रहे।
सदानन्द शिशु सदन बालिका जूनियर हाईस्कूल जापलिनगंज में शिक्षक दिवस का कार्यक्रम उल्लास पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर अन्नू राय इण्टरमीडिएट कालेज चौरा के प्रधानाचार्य डा. शिवकुमार मिश्र ने कहा कि राधाकृष्णन एक आदर्श शिक्षक के रूप में आजीवन याद किये जायेंगे।
माशिसं पाण्डेय गुट ने मनाया विरोध दिवस
उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ पाण्डेय गुट के शिक्षकों ने भी डा.राधाकृष्णन को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए 4 माह से वेतन न मिलने के कारण शिक्षक दिवस को विरोध दिवस के रूप में मनाया। संघ के प्रान्तीय उपाध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने कहा कि डा.राधाकृष्णन एक आदर्श शिक्षक के साथ ही दर्शन शास्त्र के प्रकांड ज्ञाता थे। द्वितीय राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने अपना जन्म दिवस शिक्षक दिवस के रूप में मना कर शिक्षकों जो सम्मान दिया उसके लिए शिक्षक समाज उनका आजीवन ऋणी रहेगा। इस अवसर पर ज्योति स्वरूप पाण्डेय, डा.डीएन सिंह, सुधाकर पाण्डेय आदि मौजूद रहे।
माशिसं शर्मा गुट ने दिया धरना
माशिसं शर्मा गुट ने शिक्षक दिवस के अवसर पर भृगु मंदिर में धरना दिया। इस दौरान शिक्षकों ने कहा कि अब शिक्षक होना गर्व की बात नहीं। लम्बित वेतन व सीडी जांच के नाम पर हो रहे उत्पीड़न के प्रति अपना गुस्सा अध्यापकों ने दिखाया। साथ ही शिक्षक सुरेन्द्र सिंह पर गैंगस्टर लगाये जाने की तीव्र भर्त्सना की। इस दौरान विष्णुदेव राय, अशोक श्रीवास्तव, शशि कुमार सिंह, रंगनाथ मिश्र, अरविन्द शुक्ल, आदि ने अपनी सहभागिता की। संचालन डा.शिव कुमार मिश्र ने किया।
रेड रिबन एक्सप्रेस : यौन जनित रोगों की होगी जांच!
रेड रिबन एक्सप्रेस परियोजना के तहत बलिया में सात सितम्बर को पहुंच रही रेड रिबन एक्सप्रेस ट्रेन में यौन जनित रोगों की जांच की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। प्लेटफार्म पर भी दो दर्जन स्टाल के माध्यम से स्वास्थ्य सहित अन्य विभागों की जानकारी भी पब्लिक को मुहैया करायी जाएगी। रविवार को जिला क्षय रोग अधिकारी व एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभारी कैप्टन डा.एके पाण्डेय ने पत्रकार वार्ता के दौरान प्रतिनिधियों को बताई। उन्होंने रेड रिबन एक्सप्रेस से जुड़ी सभी जानकारियों पर प्रकाश डाला। कहा कि इंजन सहित आठ बोगियों वाली इस ट्रेन में कुल छह डिब्बे ही जागरूकता कार्यक्रम के लिए हैं। एक से चार नम्बर तक की बोगियों में प्रदर्शनी तथा बोगी नं. पांच में प्रशिक्षण की व्यवस्था है। बोगी नं. छ: जांच व चिकित्सकीय उपचार के लिए है। बताया कि ट्रेन के बाहर भी लगाये गये स्टालों में एक से लेकर बारह तक स्वास्थ्य विभाग के लिए ही होगी। बाकी अन्य सरकारी विभाग के लिए है। डा.पाण्डेय ने कहा कि दूरस्थ गांवों में प्रचार हेतु भी चालीस गांवों का भी चयन किया गया है जहां मंच बनाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम किये जा रहे हैं।
महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित
रेड रिबन एक्सप्रेस के भ्रमण में असुविधा के लिए प्रशासन ने भ्रमण का एक कार्यक्रम बनाया है। कार्यक्रम के मुताबिक सात सितम्बर के प्रथम पाली का समय शहरी महिलाओं तथा द्वितीय पाली का समय शहरी क्षेत्रों के पुरुषों के लिए आरक्षित है। उसी तरह आठ सितम्बर का समय प्रथम पाली में ग्रामीण महिलाओं तथा द्वितीय पाली ग्रामीण पुरुष वर्ग के लिए है।
महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित
रेड रिबन एक्सप्रेस के भ्रमण में असुविधा के लिए प्रशासन ने भ्रमण का एक कार्यक्रम बनाया है। कार्यक्रम के मुताबिक सात सितम्बर के प्रथम पाली का समय शहरी महिलाओं तथा द्वितीय पाली का समय शहरी क्षेत्रों के पुरुषों के लिए आरक्षित है। उसी तरह आठ सितम्बर का समय प्रथम पाली में ग्रामीण महिलाओं तथा द्वितीय पाली ग्रामीण पुरुष वर्ग के लिए है।
.....आखिर पांच सौ एड्स के मरीज गये कहां!!
एड्स अब महानगरों का ही घातक रोग नहीं रहा बल्कि इसके मरीज गांव की झुग्गी-झोपड़ियों में भी मिलने लगे है। इसकी पुष्टि बलिया में अब तक मिले मरीज भी कर रहे है जो इसे महानगरों से लेकर यहां आये। सरकारी आंकड़ा अब 500 तक पहुंच गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार इनकी संख्या करीब पंद्रह सौ से ऊपर बतायी जा रही है। खतरनाक बात यह कि एड्स के मरीज चिह्नित किये जरूर जाते है लेकिन बाद में उनके बारे में कोई जानकारी नहीं हो पाती। स्वास्थ्य विभाग भी ऐसे मरीजों की खोज खबर नहीं लेता। सीएमओ डा.सुनील भारती के अनुसार इसकी रोकथाम के लिए कोई टीका अभी विकसित नहीं किया जा सका है। एड्स मरीजों को जो दवा दी जाती है वह मात्र वायरस की प्रगति को रोक देता है। दवाओं के सहारे भी मरीज को 15 से 20 साल तक ही जीवित रखा जा सकता है। इस इलाज को एआरटीओ अर्थात एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट कहा जाता है जिसके तहत मरीज को कई तरह की दवाइयां दी जाती हैं।
आईसीटीसी में अब तक पांच सौ मरीज चिह्नित
जिला चिकित्सालय के कमरा नम्बर 23 में संचालित 'एकीकृत परामर्श व परीक्षण केन्द्र' (आईसीटीसी) में अब तक पांच सौ मरीज चिह्नित किये गये है। यहां एड्स के बारे में नि:शुल्क परामर्श, जांच व दवा की व्यवस्था है। इस केन्द्र के परामर्शदाता विजय तिवारी बताते है कि एड्स का परीक्षण मरीज के खून की जांच से होता है। पुरुष को परामर्श देने के लिये पुरुष परामर्शदाता तथा महिला को परामर्श देने के लिये महिला परामर्शदाता की व्यवस्था है। इसके अलावा जिला चिकित्सालय के यौन रोग निदान केन्द्र एसटीडी सेंटर पर भी परामर्श की व्यवस्था है।
एड्स क्या है?
एड्स चार अक्षरों से बना है एआईडीएस अर्थात एक्वायर्ड इम्यून डिफिसियेंसी सिंड्रोम। यह रोग एक वायरस के कारण होता है जिसको एचआईवी कहते हैं। एचआईवी संक्रमित मरीज के शरीर के अंदर रोगों से लड़ने की क्षमता समाप्त हो जाती है जिसके कारण मरीज कई रोगों से ग्रस्त होकर 10 से 15 वर्ष के अंदर मर जाता है।
कैसे फैलता है यह
एड्स संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध से, एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने से, बिना उबली या इस्तेमाल की हुई संक्रमित सूई से, बच्चे को जन्म देते समय एचआईवी संक्रमित माता से उसके शिशु को।
एड्स संक्रमित मरीज के लक्षण
मरीज प्राय: टीबी से ग्रसित हो जाता है। वह टीवी की दवा देने से भी ठीक नहीं होता है। मरीज को लम्बे समय से बुखार रह सकता है। मरीज को डायरिया हो जाता है। उसकी ग्रंथियों में सूजन हो जाती है। मरीज का वजन तेजी से गिरता जाता है।
एड्स के संबंध में गलतफहमी
चूंकि यह लाइलाज रोग है इसलिए इसके संबंध में जानकारी के अभाव में दहशत अधिक है। एचआइवी के वायरस शरीर के बाहर सबसे दुर्बल वायरस है अर्थात शरीर के बाहर ज्यादा देर तक जीवित नहीं रह सकता है लेकिन शरीर के अंदर सबसे शक्तिशाली वायरस है जिसके आगे दवा भी लाचार हो जाती है। इसे याद रखें कि संक्रमित व्यक्ति को छूने से, मच्छर के काटने से, संक्रमित मरीज के साथ नौकरी करने से, संक्रमित मरीज के साथ खाने पीने से, संक्रमित मरीज के कपड़े पहनने से, हाथ मिलाने से या साझा शौचालय के प्रयोग से एड्स नहीं फैलता है।
सावधानियां
सुरक्षित कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए। कंडोम के अलावा अन्य कोई भी गर्भ निरोधक उपाय एड्स के प्रति सुरक्षा नहीं देते हैं। कंडोम के सही ढंग से इस्तेमाल की विधि भी ज्ञात होनी चाहिए। अज्ञात व्यक्ति जिसके चरित्र के बारे में ज्ञात नहीं है के साथ असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए। सुरक्षित रक्त का ही इस्तेमाल करना चाहिये। डिस्पोजेबल इंजेक्शन का इस्तेमाल करना चाहिए। सैलून में नये ब्लेड से सेविंग करानी चाहिए न कि उस्तरा से।
आईसीटीसी में अब तक पांच सौ मरीज चिह्नित
जिला चिकित्सालय के कमरा नम्बर 23 में संचालित 'एकीकृत परामर्श व परीक्षण केन्द्र' (आईसीटीसी) में अब तक पांच सौ मरीज चिह्नित किये गये है। यहां एड्स के बारे में नि:शुल्क परामर्श, जांच व दवा की व्यवस्था है। इस केन्द्र के परामर्शदाता विजय तिवारी बताते है कि एड्स का परीक्षण मरीज के खून की जांच से होता है। पुरुष को परामर्श देने के लिये पुरुष परामर्शदाता तथा महिला को परामर्श देने के लिये महिला परामर्शदाता की व्यवस्था है। इसके अलावा जिला चिकित्सालय के यौन रोग निदान केन्द्र एसटीडी सेंटर पर भी परामर्श की व्यवस्था है।
एड्स क्या है?
एड्स चार अक्षरों से बना है एआईडीएस अर्थात एक्वायर्ड इम्यून डिफिसियेंसी सिंड्रोम। यह रोग एक वायरस के कारण होता है जिसको एचआईवी कहते हैं। एचआईवी संक्रमित मरीज के शरीर के अंदर रोगों से लड़ने की क्षमता समाप्त हो जाती है जिसके कारण मरीज कई रोगों से ग्रस्त होकर 10 से 15 वर्ष के अंदर मर जाता है।
कैसे फैलता है यह
एड्स संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध से, एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने से, बिना उबली या इस्तेमाल की हुई संक्रमित सूई से, बच्चे को जन्म देते समय एचआईवी संक्रमित माता से उसके शिशु को।
एड्स संक्रमित मरीज के लक्षण
मरीज प्राय: टीबी से ग्रसित हो जाता है। वह टीवी की दवा देने से भी ठीक नहीं होता है। मरीज को लम्बे समय से बुखार रह सकता है। मरीज को डायरिया हो जाता है। उसकी ग्रंथियों में सूजन हो जाती है। मरीज का वजन तेजी से गिरता जाता है।
एड्स के संबंध में गलतफहमी
चूंकि यह लाइलाज रोग है इसलिए इसके संबंध में जानकारी के अभाव में दहशत अधिक है। एचआइवी के वायरस शरीर के बाहर सबसे दुर्बल वायरस है अर्थात शरीर के बाहर ज्यादा देर तक जीवित नहीं रह सकता है लेकिन शरीर के अंदर सबसे शक्तिशाली वायरस है जिसके आगे दवा भी लाचार हो जाती है। इसे याद रखें कि संक्रमित व्यक्ति को छूने से, मच्छर के काटने से, संक्रमित मरीज के साथ नौकरी करने से, संक्रमित मरीज के साथ खाने पीने से, संक्रमित मरीज के कपड़े पहनने से, हाथ मिलाने से या साझा शौचालय के प्रयोग से एड्स नहीं फैलता है।
सावधानियां
सुरक्षित कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए। कंडोम के अलावा अन्य कोई भी गर्भ निरोधक उपाय एड्स के प्रति सुरक्षा नहीं देते हैं। कंडोम के सही ढंग से इस्तेमाल की विधि भी ज्ञात होनी चाहिए। अज्ञात व्यक्ति जिसके चरित्र के बारे में ज्ञात नहीं है के साथ असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए। सुरक्षित रक्त का ही इस्तेमाल करना चाहिये। डिस्पोजेबल इंजेक्शन का इस्तेमाल करना चाहिए। सैलून में नये ब्लेड से सेविंग करानी चाहिए न कि उस्तरा से।
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